About us
राष्ट्रीय शोषित दल का विधान और संविधान
दल का उद्देश्य, सिद्धांत/नीतियां और लक्ष्य
उद्देश्य
1. हमारा दृष्टिकोण एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति समानता के आधार पर मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं का आनंद उठाए, लिंग या लिंग के आधार पर भेदभाव के बिना, दमनकारी शक्ति संबंधों से मुक्त हो, व्यक्ति और समाज सतत और समावेशी विकास से लाभान्वित हों। एक समान और न्यायपूर्ण समाज का सपना जहाँ हर पुरुष, महिला और बच्चे को हर तरह के उत्पीड़न से मुक्ति एवं एक संपूर्ण और पोषित जीवन जीने का अधिकार और समान रूप से शिक्षा एवं रोजगार के अवसर प्राप्त हो2. राष्ट्रीय शोषित दल के द्वारा सदस्यों व आम जनता में बन्धुत्व, सहयोग, भाईचारा और राष्ट्र प्रेम की भावना को बढाना, वृद्धजनों, बच्चों, महिलाओं, दलितो, शोषितों, निराश्रित लोगो एवं कमजोर वर्गों की सेवा करना व देश-विदेश के सामाजिक, राजनैतिक एवं धार्मिक विद्धानो के विचारो को समाज के हित में प्रसारित करना व समय-समय पर धार्मिक कार्यों का आयोजन करना।
3. राष्ट्रीय शोषित दल के द्वारा वृद्धजनों, बच्चों, महिलाओं, दलितो, शोषितों, निराश्रित लोगो एवं कमजोर वर्गों को उनके सवैधानिक अधिकारो से अवगत कराना व उनके विकास हेतु संघर्ष करना
4. राष्ट्रीय शोषित दल के द्वारा समाज को संगठित करना, समाज के विकास एवं सुख शांति, के लिये अच्छी शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना तथा भारतीय संविधान में प्रदत्त सामाजिक न्याय,शिक्षा और आर्थिक उत्थान के लिये प्रयास करना तथा शैक्षिक व अन्य प्रकार की संस्थायें खोलना और प्रबन्ध व्यवस्था आदि करना एवं समाज में बढ़ते अपराध को रोकना।
सिद्धांत/नीतियां(लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951की धारा 29 क (5) के अनुरूप)
भारतीय संविधान में पूर्ण निष्ठा और विश्वास के साथ भारतीय संविधान में प्रदत्त अधिकारों और कर्तव्यों के द्वारा अपना दाल "विधि द्वारा स्थापित भारत के प्रति तथा समाजवाद, पथ निरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतो के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखेगा तथा भारत की प्रभुता, एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रखेगा " और इसी सिद्धांत/नीतियों से देश-समाज, और विश्व के निर्माण में योगदान करेगा |राष्ट्रीय शोषित दल का -लक्ष्य
जाति, पंथ, सम्प्रदाय तथा लिंग भेद से ऊपर उठकर अहिंसक तरीके से ऐसे लोकतान्त्रिक राष्ट्र की स्थापना जिसमें अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता के स्थापना जिसमें अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता के साथ सभी वर्गों को अपने सामाजिक, आर्थिक, और बौद्धिक विकास के अवसर प्रदान हो तथा भू-मंण्डल के वर्तमान वैश्विक जगत में देश को सर्वप्रिय,सर्वग्राही और सभी के आकर्षण का केंद्र बनना |